Featured Post

Monday, February 22, 2010

....अक्स....



आँखों में तारे भर के...
झूमती है चितवन मेरी....
पीती हूँ वादियाँ..
मैं आजकल...
बस्ती की गंदगी भी..
अटखेलियाँ करती है..
चूम लेती हूँ
मैले गाल भी....
रिसती रही हूँ ..
खुद में..
मैं बन के .. 'तुम'
अब कौन जाने..
'अक्स' किसका है ..
..आईने में..!!

5 comments:

Amit K Sagar said...

नमस्कार,
Amazing Written! Words have lots of in depth! Keep it Up!
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है.
लिखते रहें!

[उल्टा तीर]

laveena said...

thxx amit...!!

I, Me & Myself said...

khoob bhalo....aek dum misti...

Saurabh Rastogi said...

pic and poem both is gud one.....

laveena said...

thx saurabh...!!