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Thursday, May 7, 2009

kuchh yu hi....

Har waqt jehan me kuchh na kuchh chalta hai…kya ise hi vichaar kehte hain..? agar haan to chalo aaj apne vichaar kahen jayen…
Bahut azeeb lagte hain mujhe vo log jo eshwar ki vyakhaya karte hain ya khud ko is kabil samajhte hain ki bata sake ki eshwar kya hai , kaun hai…kya sach me koi insaan itna kabil ho sakta hai…??hahaha aur usse bhi dayeneeye lagte hain vo log jo kehte hain ki hamara nazariya sahi hai tumhara galat..! hahaha…. Kya sach me bhagwaan ko jarurat hai kisi vyakhaya ki..? kya sach me kisi bhi panth ka koi bhi eshwar chahta hai ki koi uski vyakhaya kare…? Eshwar ko samajh sake itni khoobsoorti hai kahan kisi samajh me. Aur jinme ye sunderta eshwar ne di , logo ne unke naam se hi naye eswar bana liye..hahaha.
Eshwar nirakar hai..pata hai..to..?? arre to saakaar ki stuti kyuu…? Ye bhi azeeb hai ..par ek baat jo maine jani hai vo ye ki kisi bhi nirakaar ko jaanne ke liye bhi eshwar ne ye saakar tan hi banaya hai.! Varna nirakaar aatma ke hote saakaar tan ki jarurat kyuu hui.? Is hisaab se saakaar nirakaar tak pahuchne ka sadhan hai…jaise hawa ko mehsoos karne ke liye twacha , sangeet tak pahunchne ke liye tabla aur apne vichar kehne ke liye ye computer blog..hahaha..sab kuch saakaar hai…to kya bura hai…sahi hai bhai..! lo ho gayi ek aur vyakhaya…hahaha !

11 comments:

Harkirat Haqeer said...

लवीना जी,

अपने विचार सभी को कहने का हक़ है आपने भी कहे ....अपने विचारों में परिपक्वता लाइए ....दूसरों पर हंसने वाले अपना ही परिहास करते हैं .....आपकी नज़्म पढ़ी अच्छी लगी प्रयास जरी रखें.....देवनागरी में लिखने का प्रयास करें.......!!

ye word verification hta len.

RAJNISH PARIHAR said...

ji badi gambheer vyakhya ki aapne....fir bhi achha laga padh kar..

Pyaasa Sajal said...

jo log ishwar ya aisi kisi cheez pe bharosa hi nahi karte unke baare me aapki kya raay hai??

प्रकाश गोविन्द said...

बहुत गंभीर लेख है आपका ... इस पर बहुत लम्बी बहस हो सकती है !

आपसे अनुरोध है कि आप रोमन के बजाय अगर हिंदी में लिखें तो बहुत अच्छा होगा ! रोमन में पढना बड़ा दुष्कर हो जाता है ! मैंने इसे हिंदी में कर दिया है ..... आप चाहें तो इसे कापी करके पोस्ट पर पेस्ट कर सकती हैं !


"कुछ यूँ ही ...."

हर वक़्त जहन में कुछ न कुछ चलता है…क्या इसे ही विचार कहते हैं..? अगर हाँ तो चलो आज अपने विचार कहे जाएँ…
बहुत अजीब लगते हैं मुझे वो लोग जो ईश्वर की व्याख्या करते हैं या खुद को इस काबिल समझते हैं कि बता सके कि ईश्वर क्या है , कौन है…
क्या सच में कोई इंसान इतना काबिल हो सकता है…?? हाहाहा और उससे भी दयनीय लगते हैं वो लोग जो कहते हैं कि हमारा नजरिया सही है तुम्हारा गलत..! हाहाहा…. क्या सच में भगवान् को जरुरत है किसी व्याख्या कि..? क्या सच में किसी भी पंथ का कोई भी ईश्वर चाहता है कि कोई उसकी व्याख्या करे…? ईश्वर को समझ सके इतनी खूबसूरती है कहाँ किसी समझ में. और जिनमे ये सुन्दरता ईश्वर ने दी , लोगों ने उनके नाम से ही नए ईश्वर बना लिए..हाहाहा.

ईश्वर निराकार है.. पता है.. तो .. ?? अरे तो साकार कि स्तुति क्यूँ …? ये भी अजीब है ..पर एक बात जो मैंने जानी है वो ये कि किसी भी निराकार को जानने के लिए भी ईश्वर ने ये साकार तन ही बनाया है .! वर्ना निराकार आत्मा के होते साकार तन कि जरुरत क्यूँ हुई .?

इस हिसाब से साकार निराकार तक पहुचने का साधन है… जैसे हवा को महसूस करने के लिए त्वचा , संगीत तक पहुँचने के लिए तबला और अपने विचार कहने के लिए ये कंप्यूटर ब्लॉग ..हाहाहा .. सब कुछ साकार है … तो क्या बुरा है … सही है भाई .. ! लो हो गयी एक और व्याख्या … हाहाहा !

aleem azmi said...

behtareen....bahut umda likha hai aapne....

aleem azmi said...

jitni tareef karu aapki....kam hai

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

"बहुत अजीब लगते हैं मुझे वो लोग जो ईश्वर की व्याख्या करते हैं या खुद को इस काबिल समझते हैं कि बता सके कि ईश्वर क्या है , कौन है…
क्या सच में कोई इंसान इतना काबिल हो सकता है…?? "
बहुत सुन्दर....plz download unicode software for hindi

Vijay Kumar Sappatti said...

aapne likha to bahut accha hai , par ye ek charcha ka vishay ban sakta hai ...

aapki lekhni bahut sahi hai

badhai

pls vist my blog of poems :

http://poemsofvijay.blogspot.com

Regards
Vijay

Pyaasa Sajal said...

you are invited to join me in my salute to mother nature... :)

http://pyasasajal.blogspot.com/2009/05/blog-post_27.html

Pyaasa Sajal said...

thats a pretty long break...high time u resume the blogging :)

muskan said...

achha laga ...