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Monday, February 22, 2010

....अक्स....



आँखों में तारे भर के...
झूमती है चितवन मेरी....
पीती हूँ वादियाँ..
मैं आजकल...
बस्ती की गंदगी भी..
अटखेलियाँ करती है..
चूम लेती हूँ
मैले गाल भी....
रिसती रही हूँ ..
खुद में..
मैं बन के .. 'तुम'
अब कौन जाने..
'अक्स' किसका है ..
..आईने में..!!

Wednesday, February 17, 2010

....Remembering u....




I dont need paradise..
nor a garden...
not even a path of rose petals..
i am smiling..
feeling u
sitting beside..
that silence..
drives me out of..
my love deprived nights..
feeling ur hand..
holding that touch..
i am sitting here.....
looking at sky..
and smiling at u...!!