कौन हूँ मैं…? एक कवियित्री , एक लेखिका ,एक दार्शिनिक या सिर्फ एक संवेदनशील मन …पता नहीं , पर कुछ तो है जो मुझे औरों से जुदा करता है …जान लूँ खुद को फिर बता दूंगी।
Sunday, March 17, 2019
Saturday, September 1, 2018
Thursday, March 2, 2017
Sunday, October 13, 2013
Friday, August 9, 2013
Saturday, December 29, 2012
पीड़िता की मौत ...
सुबह सुबह न्यूज़ चैनल पर नज़र पड़ी ..लड़खड़ाती उंगलियाँ रिमोट पर आशंकित मन से ठहर गयीं ..पूर्वाग्रह युक्त दहशत मन पर हावी हो गयी। " पीड़िता की मौत " ! साफ़ समाचार था।।पर पीड़िता तो लाखों हैं हैं इस देश में ... वो बात अलग है की पीड़ित होने की कभी वजह अलग होती है तो कभी तरीक़े ! और फिर उस गैंग रेप की शिकार लड़की को पीड़िता क्यूँ कहा जाए ..? उसे तो नए युग की "झाँसी की रानी " कहना चाहिए जो लड़ते लड़ते शहीद हो गयी। जंग न सिर्फ जिंदगी की बल्कि एक नपुंसक सोच की ..वही सोच जो हमें पुत्र जन्म से पहले ही पुत्र प्राप्ति की इच्छा के रूप में जन्म ले लेती है। पुत्र के माता पिता होना एक गौरवान्वित अनुभव लगता है , पुत्र के जन्म लेते ही लगता है कि जैसे कोई मेडल मिल गया हो। और सारा जीवन आप उस मेडल को अपनी उपलब्धि मानते हैं। कभी प्रयास तक नहीं करते कि उस मेडल को अच्छे भावनात्मक रिश्तों की समझ , नारी का सम्मान आदि संस्कारों से चमकाएं। बल्कि बड़े होते पुत्र के समक्ष " आजकल की लडकियां तो ..." सरीखे बहुत से कटाक्ष करते हैं। की कहीं पुत्र किसी भावनात्मक मोह जाल में न उलझ जाए। और हमारा मेडल पराया न हो जाए ...यही सब सोचते सोचते फिर से न्यूज़ अपडेट पर नज़र गयी "पीड़िता की मौत" ...आँखों से दो आंसू टपके और खिसियाई हुई सी एक फीकी मुस्कान आई ... और लो हो गयी एक और पीड़िता खामोश !
सुबह सुबह न्यूज़ चैनल पर नज़र पड़ी ..लड़खड़ाती उंगलियाँ रिमोट पर आशंकित मन से ठहर गयीं ..पूर्वाग्रह युक्त दहशत मन पर हावी हो गयी। " पीड़िता की मौत " ! साफ़ समाचार था।।पर पीड़िता तो लाखों हैं हैं इस देश में ... वो बात अलग है की पीड़ित होने की कभी वजह अलग होती है तो कभी तरीक़े ! और फिर उस गैंग रेप की शिकार लड़की को पीड़िता क्यूँ कहा जाए ..? उसे तो नए युग की "झाँसी की रानी " कहना चाहिए जो लड़ते लड़ते शहीद हो गयी। जंग न सिर्फ जिंदगी की बल्कि एक नपुंसक सोच की ..वही सोच जो हमें पुत्र जन्म से पहले ही पुत्र प्राप्ति की इच्छा के रूप में जन्म ले लेती है। पुत्र के माता पिता होना एक गौरवान्वित अनुभव लगता है , पुत्र के जन्म लेते ही लगता है कि जैसे कोई मेडल मिल गया हो। और सारा जीवन आप उस मेडल को अपनी उपलब्धि मानते हैं। कभी प्रयास तक नहीं करते कि उस मेडल को अच्छे भावनात्मक रिश्तों की समझ , नारी का सम्मान आदि संस्कारों से चमकाएं। बल्कि बड़े होते पुत्र के समक्ष " आजकल की लडकियां तो ..." सरीखे बहुत से कटाक्ष करते हैं। की कहीं पुत्र किसी भावनात्मक मोह जाल में न उलझ जाए। और हमारा मेडल पराया न हो जाए ...यही सब सोचते सोचते फिर से न्यूज़ अपडेट पर नज़र गयी "पीड़िता की मौत" ...आँखों से दो आंसू टपके और खिसियाई हुई सी एक फीकी मुस्कान आई ... और लो हो गयी एक और पीड़िता खामोश !
Wednesday, December 19, 2012
इक मुलाक़ात सोंधी सी....
मेरी बेचैन नसों में
क्या दौड़ रहा है...
तुम्हें मालूम हो तो..
मुझे बता देना..
स्पर्श ने तुम्हारे..
अनजाना,अनबूझा सा..
जो साज़ छेड़ा था...
बनके राज़..
मेरी बेजान नसों को..
वो जगा गया
अँधेरे कमरे के..
कोने पे बैठे तुम...
अपना उजाला...
मुझपे उढ़ेल गए
मैं किनारे पे खड़ी..
संवेदनहीन शिला सी..
भीगती रही..
उफनती , उतरती ...
लहरों से तुम्हारी..
कहो न मुझसे..
बोलो ना
ये जो महक रही है..
मुझमें...
वो सोंधी सी गंध...
तुम्हारी तो नहीं....?
मेरी बेचैन नसों में
क्या दौड़ रहा है...
तुम्हें मालूम हो तो..
मुझे बता देना..
स्पर्श ने तुम्हारे..
अनजाना,अनबूझा सा..
जो साज़ छेड़ा था...
बनके राज़..
मेरी बेजान नसों को..
वो जगा गया
अँधेरे कमरे के..
कोने पे बैठे तुम...
अपना उजाला...
मुझपे उढ़ेल गए
मैं किनारे पे खड़ी..
संवेदनहीन शिला सी..
भीगती रही..
उफनती , उतरती ...
लहरों से तुम्हारी..
कहो न मुझसे..
बोलो ना
ये जो महक रही है..
मुझमें...
वो सोंधी सी गंध...
तुम्हारी तो नहीं....?
Sunday, December 2, 2012
Happy Birthday Papa...
मेरे हौसलों को हवा देने वाले ...
मेरी उड़ान में तू उड़ता है ...
करूँ कैसे तेरा मैं शुक्र अदा ..
— मेरे हौसलों को हवा देने वाले ...
मेरी उड़ान में तू उड़ता है ...
करूँ कैसे तेरा मैं शुक्र अदा ..
मुझमें हक़ जैसा तू बसता है !
लक़ीरे तेरी , तक़दीरें मेरी ...
हाथ मेरे , जुम्बिशें तेरी ...
क़दम मेरे , चाल तेरी ...
लहू मेरा , रवानगी तेरी !
मायूसी मेरी , हिम्मतें तेरी ..
फ़तेह मेरी , कोशिशें तेरी ...
ज़हन मेरा , सोच तेरी ...
इम्तिहां मेरा , इबादतें तेरी !
जी के खुद में तुझे ...
मैं सोच में पड़ जाती हूँ ..
गया था तू इस जहाँ से ..
या थी वो "रुखसती " मेरी !
See Moreलक़ीरे तेरी , तक़दीरें मेरी ...
हाथ मेरे , जुम्बिशें तेरी ...
क़दम मेरे , चाल तेरी ...
लहू मेरा , रवानगी तेरी !
मायूसी मेरी , हिम्मतें तेरी ..
फ़तेह मेरी , कोशिशें तेरी ...
ज़हन मेरा , सोच तेरी ...
इम्तिहां मेरा , इबादतें तेरी !
जी के खुद में तुझे ...
मैं सोच में पड़ जाती हूँ ..
गया था तू इस जहाँ से ..
या थी वो "रुखसती " मेरी !
Monday, May 16, 2011
Friday, January 28, 2011
माँ
जब जब रात गहनाती है..और कालिख चढ़ती जाती है..
मैं डर के सिमट जाती हूँ..
अपनी चादर में पैर मोड़े..
आँखें भींचें, छुप जाती हूँ
वो आवाजें , वो दहशतें..
धीमी होती जाती हैं..
मैं चुपके से , एक आँख खोले..
और एक आँख भींचे..
चादर सरकाती हूँ ..
फिर कोई नहीं जान..
चैन से सो जाती हूँ !
जब जब आँखों के कोने ..
एकांत में भीग जाते हैं..
तब यूँ ही किसी बात पे..
रोते रोते हंस जाती हूँ !
जब जब धूप में ..
जल्दी जल्दी चलते भी..
बस निकल जाती है..
और चमकते सूरज को..
चिढ़ के मैं देखती हूँ..
तभी यकायक ...
एक और बस आ जाती है..
और मैं इठलाती हुई ..
बस में चढ़ जाती हूँ !
कोई माने ना माने..
पर मुझको पता है..
राह पथरीली ही सही..
पर मेरे हर कदम पे..
" माँ " तेरा आँचल बिछा है...!!!!
Wednesday, October 27, 2010
..नारी..
Saturday, September 25, 2010
खुश्क होठों को रुबानी दे दे...
ए खुदा मुझे पहले सी जिंदगानी देदे
रह के गुलशन में सूख रहा है जो..
गुल को काँटों की निशानी दे दे
रोते बच्चे को सुना सकूँ मैं जो..
खवाब सी ऐसी कहानी दे दे
क़तरा ए शबनम जलाये है मुझे...
फिर से बरसात में आग का पानी दे दे
साफ़ चादर की चमक चुभती है...
सिलवटें इसको पुरानी दे दे
वफ़ा इंसां की नाप सके जो....
दुनिया को ऐसी क़द्रदानी दे दे
अलसाई पलकों पे न हो माज़ी.....
सुबह कोई ऐसी सुहानी दे दे
थक के सो जाऊं मैं जहां रुक के...
गोद कोई ऐसी रूहानी दे दे !!!
ए खुदा मुझे पहले सी जिंदगानी देदे
रह के गुलशन में सूख रहा है जो..
गुल को काँटों की निशानी दे दे
रोते बच्चे को सुना सकूँ मैं जो..
खवाब सी ऐसी कहानी दे दे
क़तरा ए शबनम जलाये है मुझे...
फिर से बरसात में आग का पानी दे दे
साफ़ चादर की चमक चुभती है...
सिलवटें इसको पुरानी दे दे
वफ़ा इंसां की नाप सके जो....
दुनिया को ऐसी क़द्रदानी दे दे
अलसाई पलकों पे न हो माज़ी.....
सुबह कोई ऐसी सुहानी दे दे
थक के सो जाऊं मैं जहां रुक के...
गोद कोई ऐसी रूहानी दे दे !!!
Wednesday, September 15, 2010
FOR EACH AND EVERY ONE ... WHO LOST THEIR MOTHER....LIKE ME..
.
हूँ सामने तेरे हर वक़्त पास हूँ
साया समझ मुझे ....
एहसास का अपमान न कर..
जमीं पे गुज़रा हर लम्हा...
आसमा से मैं भी तकती हूँ
हैं तेरी आँखों में गर जुगनू....
बूंदों से मैं बरसती हूँ
कभी बदरी में आती हूँ....
कभी हवा से कहती हूँ...
मांग कुदरत से भीख यूँ...
तुझे छूने को तरसती हूँ
मेरा वजूद है तुझसे.....
आज भी सांस लेता हुआ...
बोलती , हंसती , गुनगुनाती...
है तेरी मां देख "तुझमे " !!!
हूँ सामने तेरे हर वक़्त पास हूँ
साया समझ मुझे ....
एहसास का अपमान न कर..
जमीं पे गुज़रा हर लम्हा...
आसमा से मैं भी तकती हूँ
हैं तेरी आँखों में गर जुगनू....
बूंदों से मैं बरसती हूँ
कभी बदरी में आती हूँ....
कभी हवा से कहती हूँ...
मांग कुदरत से भीख यूँ...
तुझे छूने को तरसती हूँ
मेरा वजूद है तुझसे.....
आज भी सांस लेता हुआ...
बोलती , हंसती , गुनगुनाती...
है तेरी मां देख "तुझमे " !!!
Wednesday, April 21, 2010
नेह-पाश

मेरे ख़याल होंगे...
बहुत सी मुस्कानों में कोई...
एक मुस्कान सूनी होगी..
उसी मुस्कान में छिपे..
चंद सवाल होंगे..
भीड़ में ,रेड लाइट पर..
रुके हुए तुम..
जागोगे होर्न के शोर से..
और बढ़ जाओगे आगे
मेरे नेह-पाश से !
एक और जगह है ..
जहाँ मैं मिलूंगी...
रातों को सोते कभी...
देखोगे जो अपने बाजू पे...
तुम्हे चैन से सोती...
मैं दिखूंगी..
जानती हूँ...
उस पल भी..
तुम तकोगे मुझे...
बहुत प्यार से..
की कहीं मैं जग न जाऊं..
बस एक बार..
तब मेरे बालों पे...
तुम हाथ फेर देना !
यूँ ही जीवन में..
होके दूर जीवन से...
हम निशा से नींद..
और..
भोर से स्वप्न..
बाँट लेंगे..!!
Monday, February 22, 2010
....अक्स....
Wednesday, February 17, 2010
....Remembering u....
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